जल गंगा संवर्धन अभियान: जनभागीदारी से जल संरक्षण के तेजी से हो रहे है काम – गरिमा श्रीवास्तव

राजेश माली सुसनेर

*जल गंगा संवर्धन अभियान: जनभागीदारी से जल संरक्षण के तेजी से हो रहे है काम – गरिमा श्रीवास्तव*

सुसनेर। जनपद पंचायत सुसनेर के समीपस्थ ग्राम मैना में 30 मार्च से शुरू हुए जल गंगा संवर्धन अभियान के कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गये हैं। सुसनेर जनपद के ग्रामो में अब इन कार्यों की समीक्षा की जा रही है। इसी के साथ तालाब गहरीकरण, सोखता गड्ढ़ों का निर्माण सहित अन्य कार्य जनभागीदारी से तेज गति से किये जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन के कामों के प्रति जनसामान्य को दीवार लेखन सहित अन्य गतिविधियों से जागरूक किया जा रहा है। प्रदेश में आगामी वर्षा के मौसम को देखते हुए जल स्रोतों के आस-पास व्यापक पौधरोपण की योजना भी तैयार की गई है।

उक्त बात जलगंगा अभियान अंतर्गत जो कार्य सुसनेर जनपद के ग्रामो में चल रहे है उनकी मॉनीटिरिंग के लिए नईदिल्ली से सीएनओ जल शक्ति कैच द रेन श्रीमती गरिमा श्रीवास्तव ने गुरुवार को समीपस्थ ग्राम पंचायत मैना में इस अभियान के अंतर्गत चले कार्यो का निरीक्षक करते हुए कही। उनके साथ तकनीकी विशेषज्ञ के एल प्रदीप एवं सुसनेर जनपद सीईओ राजेश कुमार शाक्य भी थे। जिनका स्वागत ग्राम पंचायत मैना के सरपंच भेरूसिंह सिसोदिया ने किया।

इस अवसर पर उन्होंने यहां वृक्षारोपण भी किया।

उन्होंने यहां पर उपस्थित ग्रामवासियों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई। एवं जल स्रोतों के आस-पास निरंतर साफ-सफाई रखने की समझाइश दी गई। साथ ही उन्होंने अभियान में चल रहे कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जल संवर्धन एवं संरक्षण के लिए अब तक जो भी काम किए गए हैं उनकी जानकारी गूगल सीट में अपडेट करें। साथ ही जल संवर्धन के लिए अब तक बनाई गई सभी वाटर बॉडी की जियो टैगिंग अनिवार्य रूप से की जाये। क्षेत्र में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के सभी कार्य बरसात के पहले पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होने कहा कि जल संरचनाएं, पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार, नए अमृत सरोवरों का निर्माण, निर्मल नीर, खेत तालाब, कुओं की सफाई एवं रिचार्ज की व्यवस्था हैण्डपंपों के पास जल संरक्षण कार्य, पुरानी बावड़ियों का जीर्णोद्धार सहित सभी कार्य 20 जून तक पूरे किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि तालाबों के कैचमेंट एरिया के अवरोधों को हटाया जाए जिससे तालाबों में वर्षा का पानी पहुंच सके। जल संरचनाओं को राजस्व रिकार्ड में दर्ज किया जाए।

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