नया भवन तैयार फिर भी जर्जर और क्षतिग्रस्त भवन में संचालित हो रहा सिविल अस्पताल ,टीकाकरण, ओपीड़ी, मेटरनिटी, स्टोर रूम, लेटबाथ सभी जगह क्षतिग्रस्त, मरीज और स्टाफ सब परेशान

राजेश माली सुसनेर

नया भवन तैयार फिर भी जर्जर और क्षतिग्रस्त भवन में संचालित हो रहा सिविल अस्पताल ,टीकाकरण, ओपीड़ी, मेटरनिटी, स्टोर रूम, लेटबाथ सभी जगह क्षतिग्रस्त, मरीज और स्टाफ सब परेशान

सुसनेर। नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन सिविल अस्पताल में होने के बाद शासन द्वारा 8.68 करोड़ की लागत से नया भवन बनाया गया है जो बनकर तैयार भी हो गया है। उसके बावजूद भी अस्पताल का संचालन अंग्रेजों के जमाने के डिस्मेंटल हो चुके जर्जर भवन में किया जा रहा है। शासन ने भवन बनाकर अपनी जिम्मेदारी को पूरी समझ लिया है। अब इस भवन का शुरू करना भी तो किसी की जिम्मेदारी है। अस्पताल का टीकाकरण, ओपीड़ी, मेटरनिटी, स्टोर रूम, लेटबाथ सहित सभी जगह क्षतिग्रस्त है। स्टाफ ओर मरीज को खतरे का अंदेशा बना रहता है। लेकिन जिम्मेदारो का इस ओर कोई ध्यान नही है। शायद जिम्मेदारो को किसी बड़े हादसे का इंतजार है। मरीजों को पर्याप्त सुविधाओं का लाभ भी नही मिल पा रहा है। नगरवासियों ने जल्द ही नवीन का शुभारंभ कर अस्पताल का संचालन शुरू करने की मांग की है। ताकि मरीजो को बेहतर व पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।

*क्षतिग्रस्त कक्ष में टीकाकरण, हादसे का डर*

सिविल अस्पताल के टीकाकरण कक्ष का छज्जा क्षतिग्रस्त होकर पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। जिससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। सीमेंट कांक्रीट से बने इस छज्जे मे सरिये जंग लगकर सड़ चुके है। सीमेंट कांक्रीट भी टूट कर अलग हो गया है। जिससे यह छज्जा झुककर लटक रहा है। जो किसी बड़े हादसे को अंजाम दे सकता है। बारिश के दौरान भी छत से पानी टपकता रहता है।

*स्टोर रूम में सरिये सड़ गए, टूटकर गिर रही छत*

अस्पताल का स्टोर रूम जहा दवाईयो को रखा जाता है वहाँ की छत के सरिये सड़कर बाहर निकल रहे है। जगह-जगह से छत टूटकर कर गिर रही है। ऐसे में स्टोर में काम करने वाले कर्मचारियों की जान पर बनी रहती है। कर्मचारी डर-डर कर काम करते है। कभी भी कोई हादसा हो सकता है।

*चद्दर का बने एक कक्ष में दो डॉक्टर देख रहे मरीज*

अस्पताल में दन्त चिकित्सक और फीजियो थेरेपिस्ट दोनों एक चददर के बने कक्ष में बैठकर मरीजो का इलाज कर रहे है। कंप्यूटर ऑपरेटर भी इसी कक्ष में बैठकर कार्य करता है। जगह की कमी से परेशानी आती है। गर्मी की तपन के बीच काम करना पड़ रहा है। दीवारे क्षतिग्रस्त और चददर टूटे हुए है जिनसे हादसों का अंदेशा रहता है। बारिश में पानी भर जाता है। खिड़कियों के दरवाजे भी टूट चुके है।

*डिस्मेंटल हो चुके है ओपीडी और मेटरनिटी वार्ड*

अस्पताल का ओपीडी भवन और मेटरनिटी वार्ड भी डिस्मेंटल हो चुके है। ओपीड़ी में डॉक्टर ओर मरीजो के बैठने की पर्याप्त जगह नही है। एक कक्ष में दो डॉक्टर बैठते है। मरीज की लाइन ग्राउंड तक लगी रहती है। मेटरनिटी की छतो से पानी टपकता है। पूरी तरह जर्जर हो चुके वार्ड में पर्याप्त जगह भी नही है। महिलाओं को ग्राउंड में रहना पड़ता है। डर के साये में गर्भवती महिला प्रसव कराने पहुँच रही है।

*पर्याप्त लेट बाथ भी नही जो है उनके दरवाजे टूटे*

अस्पताल परिसर में मरीजो के लिए पर्याप्त लेट बाथ भी नही है। जनरल वार्ड में लेटबाथ के दरवाजे टूट हुए है। महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती है। लेब में यूरिन की जांच कराने आने वाली महिलाओं को खुले में बिना दरवाज़े वाले वॉशरूम का उपयोग करना पड़ता है।

अस्पताल का नया भवन बन गया है। जिसमे अस्पताल को शिफ्ट करने की हमारी तैयारी है।

                  डॉ बी बी पाटीदार

                  प्रभारी बीएमओ

             सिविल अस्पताल सुसनेर

फोटो – चददर से बने जर्जर कक्ष में चल रही डेन्टल ओर फीजियो थेरेपी

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