अहिल्याबाई होल्कर त्रिशताब्दी जयंती पर जनप्रतिनिधि सम्मेलन का हुआ आयोजन
नलखेड़ा। गुरुवार को भाजपा एवं पुण्य श्लोक अहिल्याबाई स्थानीय माँ बगुलामुखी मन्दिर भंडारा परिसर नलखेड़ा पर पुण्यश्लोक आयोजन समिति के नेतृत्व में रानी अहिल्याबाई होल्कर की त्रिशताब्दी जयंती वर्ष पर संगोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी के मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य दिलीप सकलेचा ने कहा कि भारतीय संस्कृति के उन्नयन एवं विकास में पुण्य श्लोक रानी अहिल्याबाई होल्कर की बड़ी भूमिका रही। रानी अहिल्याबाई होल्कर (31 मई 1725 – 13 अगस्त 1795) मराठा साम्राज्य की होल्कर रियासत की महान शासिका थीं। उनका जन्म महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के चोंडी गाँव में हुआ था। उनके पिता मनकोजी शिंदे एक साधारण किसान थे। कम उम्र में ही उनकी बुद्धिमत्ता और नेतृत्व क्षमता को देखकर मल्हारराव होल्कर ने उन्हें अपने पुत्र खांडेराव की पत्नी के रूप में चुना। 1754 में खांडेराव की मृत्यु के बाद और 1761 में मल्हार राव के निधन के बाद अहिल्याबाई ने होल्कर रियासत की बागडोर संभाली। उन्होंने इंदौर को अपनी राजधानी बनाया और 1767 से 1795 तक शासन किया। उनकी शासन व्यवस्था न्याय, समानता और धर्मनिरपेक्षता पर आधारित थी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम मुख्य वक्ता भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष आभा अरोड़ा चोपड़ा ने अपने सम्बोधन में उनके प्रमुख योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि रानी अहिल्याबाई ने एक कुशल और पारदर्शी प्रशासन स्थापित किया। उन्होंने भ्रष्टाचार को खत्म किया और जनता की भलाई के लिए कई सुधार किए।
उन्होंने कहा कि उन्होंने देशभर में मंदिरों, धर्मशालाओं, कुओं, तालाबों और सड़कों का निर्माण करवाया। मथुरा, वाराणसी, गया, और अन्य तीर्थ स्थलों में उनके द्वारा बनवाए गए घाट और मंदिर आज भी प्रसिद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि उस समय के रूढ़िवादी समाज में उन्होंने महिलाओं को सम्मान और अधिकार दिलाने की दिशा में कदम उठाए। उन्होंने कई युद्धों में होल्कर सेना का नेतृत्व किया और रियासत की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई को “देवी अहिल्या” के रूप में भी पूजा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने शासनकाल में जनता को माता-पिता की तरह संरक्षण दिया। उनकी मृत्यु 1795 में माहेश्वर में हुई, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है।
उन्होंने कहा कि रानी अहिल्याबाई होल्कर एक आदर्श शासिका, समाज सुधारक और धर्मनिष्ठ महिला थीं, जिन्हें उनके न्यायपूर्ण शासन और समाज सेवा के लिए हमेशा याद किया जाता है।
कार्यक्रम के सह संयोजक भाजपा जिला उपाध्यक्ष पीरूलाल कलसिया ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ कारीडोर में रानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा स्थापित करते हुए बताया था कि पुण्यश्लोक रानी अहिल्याबाई होल्कर काशी विश्वनाथ से लेकर सोमनाथ तक 3000 से ज्यादा मंदिरों का जीर्णोद्धार व निर्माण कराया था। प्राचीनता व आधुनिकता का संगम उनके जीवन में था। उन्होंने कहा कि रानी अहिल्याबाई होल्कर ने सांस्कृतिक विरासतों का पुनरूद्धार और लोकसेवा के समानांतर कार्य किए। वह लगभग 30 वर्षों तक सदैव जनसेवा के लिए समर्पित रहीं।
संगोष्ठी में मंचासीन अतिथियों ने रानी अहिल्याबाई होल्कर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय तथा डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता नलखेड़ा जनपद अध्यक्ष केसर बाई चौहान ने की। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में भाजपा जिला मंत्री मुकेश लोढ़ा, भाजपा के वरिष्ठ नेता लक्ष्मीनारायण राजपूत, भाजपा मंडल अध्यक्ष पवन वेदिया एवं भंवरसिंह चन्द्रावत, अरविंद सिंघई, भाजपा जिला कार्यालय मंत्री मोहन नागर, जनपद उपाध्यक्ष ईश्वरसिंह यादव, भाजपा अजा मोर्चा जिलाध्यक्ष शिवानन्द थे। अतिथियों का स्वागत भाजपा महिला मोर्चा जिला महामंत्री कविता आशीष शर्मा, विजयलक्ष्मी माली, कौशल्या जायसवाल, नीलम शर्मा, पूनम योगी, मांगू बाई, मंजू हेमपुष्पा आदि ने स्वागत किया।
संगोष्ठी का संचालन भाजपा महिला मोर्चा जिला महामंत्री साक्षी विक्रम सकलेचा ने किया तथा आभार भाजपा महिला मोर्चा मण्डल अध्यक्ष नलखेड़ा अलका जैन ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, भाजपा एवं महिला मोर्चा की पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताएं उपस्थित थे।
चित्र 1 : कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष आभा अरोड़ा चोपड़ा।
चित्र 2 : कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा एवं महिला मोर्चा कार्यकर्ताएं।
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