कब तक चलेगा बिना मशीनों के प्रदूषण जांच केंद्र ,प्रशासन की नाक के नीचे फर्जीवाड़ा ,आखिर किसकी शह पर पनप रहा खेल

राजेश माली सुसनेर

कब तक चलेगा बिना मशीनों के प्रदूषण जांच केंद्र ,प्रशासन की नाक के नीचे फर्जीवाड़ा ,आखिर किसकी शह पर पनप रहा खेल

सुसनेर नगर में इंदौर कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग 552 जी पर स्थित ग्राम पगारिया टोल प्लाजा स्थित प्रदूषण जांच केंद्र में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि इस केंद्र के पास प्रदूषण जांच के लिए आवश्यक मशीनें मौजूद नहीं हैं, फिर भी वाहनों को धड़ल्ले से प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) जारी किए जा रहे हैं।

प्रदूषण जांच केंद्र का लाइसेंस भारत राज रायका, पिता अमरलाल रायका के नाम से है, लेकिन नियमानुसार अनिवार्य धुआं जांचने वाली मशीनें यहां उपलब्ध नहीं हैं। बिना जांच किए ही वाहनों को प्रमाण पत्र देने से इस केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को झटका

बिना जांच जारी किए जा रहे प्रमाण पत्रों के कारण कई वाहन मानकों को पूरा किए बिना सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। यह न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

प्रशासन की नाक के नीचे फर्जीवाड़ा

सूत्रों का कहना है कि इस अवैध कार्य में किसी बड़े अधिकारी या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्ति की संलिप्तता हो सकती है। सवाल यह उठता है कि प्रशासन की नाक के नीचे यह गोरखधंधा आखिर कैसे फल-फूल रहा है? क्या हो सकता है समाधान?

प्रशासन को सभी प्रदूषण जांच केंद्रों की कड़ी निगरानी करनी चाहिए।

गड़बड़ी मिलने पर संबंधित केंद्रों के लाइसेंस तत्काल रद्द किए जाएं।

प्रत्येक वाहन का फिजिकल टेस्ट अनिवार्य किया जाए और इसकी रिपोर्टिंग नियमित रूप से हो।

आमजन को जागरूक किया जाए कि वे फर्जी प्रमाण पत्र लेने से बचें और अपनी गाड़ियों की नियमित जांच कराएं।

यदि इस मामले की जल्द जांच नहीं हुई, तो यह एक बड़े घोटाले का रूप ले सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है या फिर यह अवैध खेल यूं ही जारी रहेगा?

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