नापतोल विभाग की जांच के दौरान हिन्दुस्तान पैट्रोल पम्प संचालक ने फिर बनाया पत्रकारों को निशाना

राजेश माली सुसनेर

नापतोल विभाग की जांच के दौरान हिन्दुस्तान पैट्रोल पम्प संचालक ने फिर बनाया पत्रकारों को निशाना

सुसनेर-सोयतकलां। देश की समस्त पेट्रोलियम कंपनीया, अपने आइल प्रोडक्ट की अधिकतम सेल , एवं उपभोक्ताओं की संतुष्टि के लिए, हर तरह के सम्भव प्रयास के लिए कटिबद्ध है, जिस प्रकार गाइडलाइंस अनुसार उपभोक्ताओं, के लिए पम्प संचालक द्वारा दी जाने वाली सेवाओं निहित है वही पम्प संचालक व कर्मचारियों द्वारा उपभोक्ता की सन्तुष्टि, एवं उनके साथ, संन्तुलित भाषा का इस्तेमाल करना भी जरूरी है,

ताकि कंपनी और उसके प्रोडक्ट की साख धुमिल न हो, लेकिन आगर मालवा जिले के सोयत नगर स्थित हिंदुस्तान पैट्रोलियम मारवाड़ी फिलिग सेन्टर संचालक द्वारा, सरकारी एवं हिंदुस्तान पैट्रोलियम गाइडलाइंस को धता बताते हुऐ पेट्रोल पंप का संचालन किया जा रहा है, ताजा एवं चर्चित मामले के तहत, 6 जुलाई को दिल्ली से नागपुर जा रहे उपभोक्ता के साथ कम पेट्रोल को लेकर थाना आवेदन तक पहुंचे मामले में, मारवाड़ी फिलिग सेंटर संचालक से, स्टेटमेंट लेने पहुंचे पत्रिका पत्रकार से धमकी भरे ले लहजे में बात करना, समाचार पत्रों के प्रकाशन के 2 दिन बाद जांच एवं निरीक्षण पर आई जिला नापतोल विभाग टीम के निरीक्षण का कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों को, एक सरकारी संस्था के इशारे पर चलने वाले दलाल बताने का प्रयास करना अन्य आरोप उन पर थोपना मीडिया को जलील करने जैसे प्रयास, क्या हिंदुस्तान पेट्रोलियम कंपनी के पेट्रोल पंप संचालक को शोभनीय है यह सोचने वाली बात होगी कि अगर,पम्प संचालक, का मिडिया द्वारा वर्जिन व मिडिया के कवरेज पर यह प्रकिया है तो आम उपभोक्ता से क्या रहती होगी।

आखिर क्यों,120 लीटर का पेट्रोल खरीदने को मजबुर है लोग –

                      -कई वर्षों के इंतजार के बाद नगर मे लगभग दो वर्ष पहले, हिंदुस्तान पेट्रोल पंप की स्थापना से अति ज्यादा खुश हुए लोग, आखिर क्यों नगर के पेट्रोल पंप को छोड़कर 105 रुपए लीटर का पेट्रोल 120 व 130 रुपए लीटर में खरीदने को क्यों मजबूर हैं अंदाज आसानी से लगाया जा सकता है रही नगर व क्षेत्र के आमजन की आपबिती व मन की बात,

 तो उसे एकत्रित करते-करते कलम की शाही एवं मोबाइल की मेमोरी भी शायद कम पड़ जाएगी। यह सोचने का विषय है अगर इस पम्प पर क्वालिटी, मात्रा एवं प्राइज अगर सही होती, तो लोग पेट्रोल के 15 से 25 रूपये प्रति लीटर ज्यादा देकर या फिर अन्य जगह व अन्य प्रांत जाकर तेल क्यों खरीदते इस पंप से क्यों नहीं,

कम्प्रेसर है लेकिन हवा डालने का प्रावधान नहीं संचालक ने बताया नापतोल अधिकारी को कानून-

                       -नापतोल विभाग अधिकारी द्वारा पंप संचालक से उपभोक्ता सुविधाओं के बारे में पूछा गया तो संचालक ने बताया कि वाहनों में हवा के लिए कंप्रेसर है लेकिन डालने वाला नहीं, वाहन चालक को अपने हाथों से हवा डालना होगी इसमें कर्मचारियों का कोई प्रावधान नहीं है पानी के लिए नगर पालिका ने प्याऊ लगा रखी थी कल हटा ली गई, इसके अलावा हमारे पास अलग से भी व्यवस्था है रही छांव की बात, तो सब कुछ खुले में चल रहा था ।

नापतोल विभाग द्वारा की गई जांच हुई बेअसर-

                      – किसी भी घटना की जांच व, निरीक्षण में देरी, निरीक्षण में आने वाले साक्ष्यो को नष्ट करने हटाने में काफी सहायक सिद्ध होती है, जैसा इस प्रकरण में हुआ है प्रकरण में सुत्रो का मानना है कि, शिकायत 6 जुलाई को जांच 9 जुलाई को, इन तीन दिनों में हुआ सब कुछ विधीवत सेटअप, बचा ही क्या था जो जांच में नापतोल जिला अधिकारी दीप शिखा नागले के निरिक्षण व सत्यापन के दौरान सामने आता। सत्यापन को लेकर जांच अधिकारी ने बताया कि हमारे विभाग द्वारा पिछले वर्ष यहां स्टेपिंग की गई थी सत्यापन के बाद मशीन से छेड़छाड़ सम्भव नहीं अगर बात पेट्रोल डीजल में मिलावट या अन्य तरह की है तो इसकी जांच का अधिकार हमें नहीं, हमारा काम सिर्फ उकरण की जांच व सत्यापन है। डीजल पेट्रोल की जांच व शेष कार्य अन्य विभाग का है।

चित्र 1 : सोयतकलां पेट्रोल पंप

चित्र 2 व 3 : नापतोल विभाग के अधिकारी पेट्रोल पंप की जांच करते हुए।

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