वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में पास, अब राज्यसभा में चर्चा जारी, रिजिजू बोले बिल में ट्रांसपेरेंसी, एक्यूरेस
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन बिल राज्यसभा में पेश किया. उन्होंने कहा कि व्यापक चर्चा के बाद तैयार किए गए बिल को जेपीसी के पास भेज दिया गया था. वक्फ को लेकर जेपीसी ने जितना काम किया, उतना काम किसी कमेटी ने नहीं किया. देर रात तक चर्चा के बाद आज सुबह इस बिल को लोकसभा से पारित कर दिया गया. देर रात दो बजे वोटिंग में ें 520 सांसदों ने भाग लिया, 288 ने पक्ष में और 232 ने विपक्ष में वोट डाले.
केन्द्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि कांग्रेस की सरकार के समय गठित कमेटियों व सच्चर कमेटी की सिफारिशों का भी जिक्र सदन में किया. रिजिजू ने कहा कि आप जो नहीं कर सके, वह करने की हिम्मत हमने दिखाई है और ये बिल लेकर आए हैं. आप इसका समर्थन करेंगे, ऐसी उम्मीद है. हम कोई नया काम नहीं कर रहे इतिहास गवाह है कि पहले भी ऐसा हुआ है और संशोधनों का इतिहास भी गिनाया. इससे पहले लोकसभा में 12 घंटे की चर्चा के बाद वक्फ संशोधन बिल पास हो गया.
रात 2 बजे हुई वोटिंग में 520 सांसदों ने भाग लिया. 288 ने पक्ष में और 232 ने विपक्ष में वोट डाले. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे उम्मीद (यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट) नाम दिया है. चर्चा के दौरान सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बिल फाड़ दिया. उन्होंने कहा कि इस बिल का मकसद मुसलमानों को जलील करना है. मैं गांधी की तरह वक्फ बिल को फाड़ता हूं. बिल पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वक्फ में गैर इस्लामिक नहीं आएगा. ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. वोट बैंक के लिए माइनॉरिटीज को डराया जा रहा है.
इससे पहले राज्यसभा में सुबह भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े पर दिए बयान पर विपक्ष के सांसदों ने हंगामा किया. श्री ठाकुर ने कहा था कि कर्नाटक में वक्फ की जमीन का भ्रष्टाचार हुआ है. इसमें कांग्रेस अध्यक्ष खडग़े भी शामिल हैं. इस पर खडग़े ने कहा कि आरोप सिद्ध करें या इस्तीफा दें. खडग़े ने कहा कि अनुराग ठाकुर उनके या उनके परिवार के किसी भी सदस्य के वक्फ बोर्ड की 1 इंच भी जमीन पर कब्जे को साबित कर देते हैं, तो मैं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा दे दूंगा.
श्री रिजिजू ने कहा कि अब जो ट्रिब्यूनल बनेगा, उसका फिक्स टेन्योर (नियत कार्यकाल) होगा. यदि ट्रिब्यूनल में आपको हक नहीं मिला तो सिविल मामले में किसी और अदालत में अपील कर सकते हैं. पहले ऐसा नहीं था, हमने ये बदलाव किया है.
रिजिजू बोले कि हमने ये सुनिश्चित किया है कि जो डिवोर्सी महिलाएं हैं, अनाथ बच्चे हैं, उनके लिए प्रावधान होना चाहिए. कोई वक्फ क्रिएट कर सकता है, लेकिन महिला के अधिकारों में छेड़छाड़ नहीं कर सकते. 21वीं सदी में इतनी प्रगतिशील सोच तो रखनी होगी.
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