बड़ा अखाड़ा मैहर श्री सदगुरुदेव भगवान के सानिध्य में रंग पंचमी महा महोत्सव कार्यक्रम सुखदास में संपन्न।अभूतपूर्व जिला अध्यक्ष श्री दिलीप पांडे रंग पंचमी महामहोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए

संजय तिवारी उमरिया

बड़ा अखाड़ा मैहर श्री सदगुरुदेव भगवान के सानिध्य में रंग पंचमी महा महोत्सव कार्यक्रम सुखदास में संपन्न।अभूतपूर्व जिला अध्यक्ष श्री दिलीप पांडे रंग पंचमी महामहोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए।

उमरिया जिले के मानपुर जनपद अंतर्गत ग्राम सुखदास में प्रत्येक वर्षों की भांति इस वर्ष भी रंग पंचमी महामहोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें 18 मार्च सुबह श्रीराम संकीर्तन श्री सदगुरुदेव भगवान का आगमन एवं 19 मार्च को रंग पंचमी महामहोत्सव बड़े धूमधाम के साथ रंगपंचमी महामहोत्सव कार्यक्रम किया गया जिसमें बड़ा अखाड़ा मैहर के मंहत श्री सीता वल्लभ शरण जू महाराज रंग पंचमी महामहोत्सव कार्यक्रम में श्रृद्धालुओं को दर्शन लाभ आर्शीवाद दिए वहीं भारतीय जनता पार्टी के ऊर्जावान अभूतपूर्व जिला अध्यक्ष श्री दिलीप पांडे ने सुखदास में आयोजित रंगपंचमी कार्यक्रम में शामिल हुए श्री महाराज जी का पूजन अर्चना की श्री महराज जी ने उपस्थित श्रृद्धालुओं को आशीर्वाद वचन देते हुए भगवान नाम संकीर्तन जप करने के लिए कहा श्री गुरु देव भगवान ने कहा कि ईश्वर को पाने के 3 रास्ते गीता में बताए गए हैं। इनमें पहला है कर्म योग। दूसरा ज्ञान और तीसरा भक्ति याेग। भगवान श्रीकृष्ण जब अर्जुन को इन तीनों तरीके के बारे मे बताते हैं तब अर्जुन कहते हैं कि वे इन तीनों रास्तों पर नहीं चल पाएंगे। तब भगवान कहते हैं कि चौथा और सबसे आसान तरीका है शरणागति, लेकिन इसके लिए आपको मैं छोड़कर धर्म का होना पड़ेगा।

उन्होंने आगे कहा कि भगवान श्रीकृष्ण इस संसार की शुरुआत से पहले भी थे और इस संसार के अंत के बाद भी रहेंगे। सभी मनुष्यों को गीता के पहले श्लोक के पहले शब्द ‘धर्म’ और आखिरी श्लोक के आखिरी शब्द ‘मम ‘ को याद रखना ही काफी है। धर्म मम का मतलब है- धर्म मेरा है, मै धर्म का हूं। इसलिए जो भी श्रीकृष्ण को इस भावना से स्मरण करेगा वो उन्हें पा सकेगा। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन को योग के बारे में बताते हुए श्रीकृष्ण कहते हैं कि मुझे पाने के तीन मार्ग हैं- कर्म योग, ज्ञान योग और भक्ति योग। अगर कोई व्यक्ति इन तीन मार्ग पर भी न चल सके तो मुझे सबसे आसान तरीके से पा सकता है और वो मार्ग है- शरणागति। जो भी मेरे शरण में आ जाएगा उसे इस भवसागर से पार लगने में क्षणभर भी नहीं लगेगा सभी ने सदगुरुदेव भगवान के दर्शन पुजन लाभ लिया और भव्य भंडारे का प्रसाद ग्रहण किए भारी संख्या पर ग्रामीण क्षेत्रीय जन उपस्थित रहे।

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