धार जिले में लगेंगे सर्वाधिक 59 हाट बाजार आदिवासी अंचल में भगोरिया की मचेगी धूम.. 24 फरवरी से हाट बाजारों में उमड़ेगा जनसैलाब..बाग, मनावर में 27 फरवरी शुक्रवार को भगोरिया

शकील खान मनावर 9755 4987 52

धार जिले में लगेंगे सर्वाधिक 59 हाट बाजार आदिवासी अंचल में भगोरिया की मचेगी धूम.. 24 फरवरी से हाट बाजारों में उमड़ेगा जनसैलाब..बाग, मनावर में 27 फरवरी शुक्रवार को भगोरिया*

मनावर। जिला धार।। आदिवासी समाज के उल्लास और उमंग के लोकपर्व भगोरिया की शुरुआत इस बार 24 फरवरी से होगी। एक सप्ताह तक चलने वाला यह भगोरिया होलिका दहन के दिन 02 मार्च को संपन्न होगा। इसे भोंगर्या भी कहा जाता है। इस वर्ष पश्चिम मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग के पांच आदिवासी बहुल जिलों में 176 गांवों और कस्बों में भगोरिया की धूम रहेगी। धार जिले में सर्वाधिक 59, झाबुआ जिले में 36, आलीराजपुर जिले में 24, बड़वानी जिले में 45 व खरगोन जिले में 12 स्थानों पर आदिवासियों के लोकप्रिय सांस्कृतिक लोकपर्व भगोरिया का आयोजन होगा। इनमें संख्या के लिहाज से बात करें तो मप्र में सर्वाधिक धार जिले में 59 स्थानों पर भगोरिया हाट लगेंगे। इसी तरह इंदौर संभाग में केवल विकासखंड स्तर की बात की जाए तो डही विकासखंड ही ऐसा है जहां लगातार सप्ताह भर भगोरिया की धूम रहेगी।

*ड्रेस कोड में युवक युवतियां*

भगोरिया पर्व मध्य प्रदेश विशेषकर आदिवासी बाहुल्य झाबुआ, अलीराजपुर और धार जिले के भील और भिलाला समाज का होली से 7 दिन पहले मनाया जाने वाला एक प्रमुख।लोकपर्व है। यह उत्साह, उमंग और प्रेम का सांस्कृतिक उत्सव है। इसे हाट-बाजार के रूप में मनाया जाता है। जहां पारंपरिक नृत्य, संगीत, और रंगों के साथ बच्चे युवक युवतियां और वृद्धजन फसलों की कटाई का जश्न मनाते हैं। यह होली से एक सप्ताह पहले शुरू होता है और मुख्य रूप से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में हॉट के दिन आदिवासी समाज द्वारा रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों से सुसज्जित होकर उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। आधुनिकता के बदले दौर में युवक युवतियां ड्रेस कोड में नजर आती है।

*आदिवासी संस्कृति और आधुनिकता का संगम*

यह आदिवासी संस्कृति और आधुनिकता का संगम है। आदिवासी समाज पारंपरिक पोशाक पहनकर वाद्ययंत्रों (ढोल, मांदल) पर नाचते-गाते हैं। मान्यता है कि इस उत्सव की शुरुआत राजा भोज के समय में हुई थी, जब भील राजा कासूमार और बालून ने भगोर (पुराना नाम) में इस हॉट (मेले) को शुरू किया था। इसे भोंगर्या, भगोरिया भी कहते है। भगोरिया हाट में शामिल होने के लिए आदिवासी लोग दूर-दूर से अपने घरों को लौटते हैं और ग्रामीण अपनी परंपराओं के अनुसार जीवन जीते हैं। भगोरिया पर्व आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जो हर साल होली के आगमन पर मनाया जाता है। इसे प्रेम का उत्सव माना जाता है, जहाँ पारंपरिक रूप से युवक युवतियों द्वारा एक दूसरे को रंग या गुलाल लगाने की परंपरा रही है। यह फसल कटाई के बाद खुशी मनाने का मौका भी है।

मान्यता है कि इस उत्सव की शुरुआत राजा भोज के समय में हुई थी, जब भील राजा कासूमार और बालून ने भगोर (पुराना नाम) में इस हॉट (मेले) को शुरू किया था। इसे भोंगर्या, भगोरिया भी कहते है। भगोरिया हाट में शामिल होने के लिए आदिवासी लोग दूर-दूर से अपने घरों को लौटते हैं और ग्रामीण अपनी परंपराओं के अनुसार जीवन जीते हैं। भगोरिया पर्व आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जो हर साल होली के आगमन पर मनाया जाता है।

*त्योहारिया और भगोरिया हाट से मिलेगी व्यापार को रफ्तार*

17 फरवरी से त्योहारिया हाट शुरू होने से मंद पड़े व्यवसाय को रफ्तार मिलेगी आदिवासी अंचल में 17 से 23 फरवरी तक भगोरिया से पहले लगने वाले साप्ताहिक हाट त्योहारिया हाट बाजार के नाम से भरेंगे। ऐसे में मंदी के दौर से गुजर रहे बाजारों में व्यापार को त्योहारिया हाट बाजारों से रफ्तार मिलेगी। कारण यह है कि भगोरिया के चलते आदिवासी बंधू त्योहारिया हाट में कपड़ा, श्रृंगार, आभूषण, किराना आदि सामग्री की जमकर खरीदारी करते हैं।

*जिले में प्रमुख भगोरिया हाट*

*24 फरवरी मंगलवार* करजवानी (उडी), कुक्षी, नालछा धरमपुरी, तिरला।

*25 फरवरी बुधवार* अराड़ा (डही). सरदारपुर, सलकनपुर, गोलपुरा।

*26 फरवरी गुरुवार* डही, रिंगनोद, दत्तीगांव, गुजरी, बाकानेर, सिंघाना।

*27 फरवरी शुक्रवार* धरमराय व पड़ियाल (डही); धामनोद, मनावर, जौलाना

*28 फरवरी शनिवार* कवड़ा व बाबली (डही), खलघाट, मांडू।

*01 मार्च रविवार* बड़वान्या (डही) राजगढ़, गंधवानी, टांडा, भारुड़पुरा।

*02 मार्च सोमवार* फिकेड़ा (डही) बाग, निसरपुर, डेहरी, धानी, गुमानपुरा।

गौरतलब है कि त्योहारिया हाट से लेकर भगोरिया हाट यानी 15 दिन तक अच्छा व्यापार होता है। इसके बाद होली से रंगपंचमी तक व्यापार व्यवसाय फिर मंदा हो जाता है। क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोगों का गुजरात और मालवा के शहरों में पलायन होता है। ऐसे में त्योहारिया और भगोरिया नजदीक होने के चलते क्षेत्र से बाहर गए मजदूरों का वापस क्षेत्र में आने का क्रम शुरू होने लगेगा। ऐसे में मजदूरों के क्षेत्र में वापस आ जाने से बाजार को मजबूती मिलेगी।

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