मकर संक्रांति योग, खगोल विज्ञान और आधुनिक शोध का वैज्ञानिक उत्सव:- योगाचार्य महेश पाल

मोहन शर्मा म्याना

मकर संक्रांति योग, खगोल विज्ञान और आधुनिक शोध का वैज्ञानिक उत्सव:- योगाचार्य महेश पाल

   

मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि खगोल विज्ञान, योगशास्त्र और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि यह पर्व उस खगोलीय घटना का प्रतीक है, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है और उसकी गति उत्तरायण हो जाती है। यह परिवर्तन प्रकृति के साथ-साथ मानव शरीर और मन पर भी गहरा प्रभाव डालता है। वैज्ञानिक दृष्टि से मकर संक्रांति के समय सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक सीधे और अनुकूल कोण से पड़ती हैं। इसके परिणामस्वरूप सौर ऊर्जा का अवशोषण बढ़ता है, पृथ्वी का तापीय संतुलन सुधरता है जैविक घड़ियाँ (Biological Clock) पुनः सक्रिय होती हैं, इसी कारण प्राचीन भारतीय खगोलविदों ने इस काल को ऊर्जा परिवर्तन काल (Energy Transition Phase) माना। योगशास्त्र में उत्तरायण का विशेष महत्व है योगशास्त्र के अनुसार मानव शरीर सूर्य से प्राप्त प्राण शक्ति से संचालित होता है। उत्तरायण काल में प्राण ऊर्जा का प्रवाह ऊर्ध्वगामी होता है योग, ध्यान और साधना का प्रभाव शीघ्र दिखाई देता है, शरीर में सत्व गुण की वृद्धि होती है,हठयोग और उपनिषदों में उत्तरायण को आत्मिक उन्नति का श्रेष्ठ काल कहा गया है।मकर संक्रांति पर सूर्य नमस्कार का विशेष महत्व है। यह 12 योगासनों की एक संपूर्ण श्रृंखला है, जो शरीर की लगभग सभी प्रमुख प्रणालियों को सक्रिय करती है। आधुनिक शोध के अनुसार सूर्य नमस्कार और प्रज्ञा योग एंडोक्राइन सिस्टम (थायरॉइड, पिट्यूटरी, एड्रिनल) को संतुलित करता है,मेटाबॉलिक रेट और ऑक्सीजन उपयोग क्षमता बढ़ाता है

हार्ट रेट वैरिएबिलिटी में सुधार करता है तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल को कम करता है, इसी कारण आज सूर्य नमस्कार को प्रिवेंटिव हेल्थ और वेलनेस प्रोग्राम का हिस्सा बनाया जा रहा है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार उत्तरायण काल में सूर्य प्रकाश से मिलने वाला विटामिन-D हड्डियों को मजबूत करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, अवसाद और मौसमी मानसिक तनाव को कम करता है, योग अभ्यास के साथ सूर्य प्रकाश का संयोजन एक प्राकृतिक इम्युनो-बूस्टर के रूप में कार्य करता है।तिल-गुड़ की परंपरा : पोषण विज्ञान का प्रमाणमकर संक्रांति पर तिल और गुड़ के सेवन की परंपरा भी पूर्ण रूप से वैज्ञानिक है तिल में कैल्शियम, आयरन और आवश्यक फैटी एसिड गुड़ में खनिज तत्व और त्वरित ऊर्जा यह संयोजन शीत ऋतु में शरीर को ऊष्मा, शक्ति और पोषण प्रदान करता है।योगिक जीवनशैली का संदेश मकर संक्रांति हमें यह सिखाती है कि जैसे सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ता है, वैसे ही मनुष्य को भी—आलस्य से सक्रियता, रोग से स्वास्थ्य तनाव से संतुलन, नकारात्मकता से सकारात्मकता, की ओर बढ़ना चाहिए। योग इस परिवर्तन का वैज्ञानिक और व्यावहारिक माध्यम है। मकर संक्रांति भारतीय ज्ञान परंपरा की वह वैज्ञानिक उपलब्धि है, जहाँ खगोल विज्ञान, योग और आधुनिक चिकित्सा एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं। इस पावन पर्व पर योग, विशेषकर सूर्य नमस्कार और प्रज्ञा योग को अपनाना केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की वैज्ञानिक रणनीति है।मकर संक्रांति का संदेश स्पष्ट है सूर्य के साथ चलें, योग के साथ जिएँ और विज्ञान के साथ स्वस्थ रहें।

About Author

Categories:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!