जिन्होंने अपना बेटा खोया उस बेटे के माता-पिता की कलम से नई पीढ़ी के नाम एक मार्मिक संदेश यह केवल एक पिता का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज की पुकार है। आनंद कासलीवाल स्वर्गीय प्रखर कासलीवाल

इरफान अंसारी उज्जैन

जिन्होंने अपना बेटा खोया उस बेटे के माता-पिता की कलम से नई पीढ़ी के नाम एक मार्मिक संदेश यह केवल एक पिता का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज की पुकार है। आनंद कासलीवाल स्वर्गीय प्रखर कासलीवाल

पाश्चात्य संस्कृति, नाइट कल्चर और तेज रफ्तार गाड़ियों ने आज कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं।

मैं भी उन अभागे माता-पिता में से हूँ, जिसने अपना बेटा खो दिया।

आज के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में नई पीढ़ी सप्ताहांत और संडे को सुकून के बजाय पार्टियों में गुजार रही है। रात-रात भर चलने वाली पार्टियाँ, शराब, तेज रफ्तार वाहन—इन सबका खामियाजा आज हमारी युवा पीढ़ी को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

लगभग रोज़ हम समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पढ़ते-देखते हैं कि सड़क दुर्घटनाओं में कितने ही नौजवान असमय इस दुनिया से चले गए।

मैं आज की युवा पीढ़ी से हाथ जोड़कर कहना चाहता हूँ—

नाचिए, गाइए, मौज-मस्ती कीजिए, पार्टी भी कीजिए, लेकिन उसकी एक समय-सीमा होनी चाहिए।

क्या इतनी देर रात तक पार्टी करना ज़रूरी है कि माता-पिता और परिवार चैन की नींद भी न सो सकें?

आज की युवा पीढ़ी ने पैसा कमाने में भले ही पुरानी पीढ़ी को पीछे छोड़ दिया हो, लेकिन जीवन की कीमत को भूलती जा रही है। जब कोई युवा चला जाता है, तो वह अकेला नहीं जाता—पूरा परिवार जीवनभर के लिए दुःख में डूब जाता है।

यह समस्या केवल मेरे घर की नहीं, बल्कि आज समाज के हर दूसरे घर की है।

दुर्भाग्य की बात यह है कि आज की युवा पीढ़ी न किसी की सुनती है और न ही समझती है। उन्हें लगता है कि जो वे कर रहे हैं वही सही है, जबकि उसके परिणाम पूरे समाज को भुगतने पड़ते हैं।

युवा पीढ़ी से निवेदन

अपने पैसों का सदुपयोग करें, समय का ध्यान रखें और जीवन को जोखिम में न डालें।

याद रखें—रात का अंधेरा और काल किसी को माफ नहीं करता।

प्रशासन से निवेदन

1. शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में रातभर चलने वाली पार्टियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।

गाँवों में चल रही अवैध पार्टियों की जानकारी प्रशासन तक नहीं पहुँच पाती—इस पर विशेष निगरानी जरूरी है।

2. डीजे और तेज़ आवाज़ वाले कार्यक्रमों पर सख्ती हो, ताकि कई घरों के चिराग बुझने से बच सकें।

3. शराब की दुकानों का समय रात्रि 9 बजे तक ही सीमित किया जाए।

4. शहरों में रात 11 बजे से सुबह 4 बजे तक चलने वाले ढाबों, रेस्टोरेंट और क्लबों पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए।

समाज और राजनीति से अपील

समाजसेवी संस्थाएँ, राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि मिलकर जनजागरण अभियान चलाएँ और शासन-प्रशासन को इन विषयों पर कठोर निर्णय लेने के लिए बाध्य करें।

कानून का उद्देश्य स्वतंत्रता देना है, लेकिन अनुशासन के बिना स्वतंत्रता समाज को विनाश की ओर ले जाती है।

संयम, मर्यादा और जिम्मेदारी—यही एक सुरक्षित समाज की पहचान है।

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