उज्जैन पुलिस की तत्परता से वृद्ध दंपती डिजिटल अरेस्ट से हुये मुक्त,डिजिटल अरेस्ट पर उज्जैन पुलिस की त्वरित कार्रवाही, एसबीआई नई सड़क शाखा में वृद्ध खाताधारक को 3 लाख रुपये की ठगी से बचाया
उज्जैन पुलिस की तत्परता से वृद्ध दंपती डिजिटल अरेस्ट से हुये मुक्त,डिजिटल अरेस्ट पर उज्जैन पुलिस की त्वरित कार्रवाही, एसबीआई नई सड़क शाखा में वृद्ध खाताधारक को 3 लाख रुपये की ठगी से बचाया ।
मुंबई पुलिस बनकर गिरफ्तारी का भय दिखाकर आरटीजीएस कराने का प्रयास विफल, पुलिस की सजगता से टली बड़ी आर्थिक क्षति ।
रिटायर आर्मी अधिकारी को फर्जी गिरफ्तारी वारंट व वीडियो कॉल से डराने का मामला, उज्जैन पुलिस ने संवेदनशीलता से दिलाया भरोसा ।
भारतीय स्टेट बैंक शाखा नई सड़क, उज्जैन के सीनियर एसोसिएट प्रियांक द्वारा एसडीओपी खाचरौद श्रीमती आकांक्षा को सूचना दी गई कि बैंक शाखा में एक वृद्ध खाताधारक उपस्थित हैं, जो अपने खाते से 03 लाख रुपये आरटीजीएस कराना चाहते हैं। खाताधारक अत्यंत घबराए हुए प्रतीत हो रहे थे एवं पूछताछ करने पर संतोषजनक जानकारी नहीं दे पा रहे थे।
प्राप्त सूचना की गंभीरता को देखते हुए एसडीओपी खाचरौद द्वारा तत्काल राजपत्रित अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में सूचना साझा की गई। सूचना मिलते ही नगर पुलिस अधीक्षक कोतवाली राहुल देशमुख एवं नगर पुलिस अधीक्षक माधवनगर श्रीमती दीपिका शिंदे द्वारा तत्परता दिखाते हुए बैंक शाखा प्रबंधक से दूरभाष पर संपर्क किया गया तथा खाताधारक को कुछ समय बैंक में ही रोककर आरटीजीएस प्रक्रिया तत्काल न करने की समझाइश दी गई।
इसके पश्चात दोनों पुलिस अधिकारी अपनी-अपनी टीम के साथ तत्काल बैंक शाखा पहुंचे एवं शाखा प्रबंधक तथा उक्त वृद्ध खाताधारक से प्रत्यक्ष चर्चा की गई। प्रारंभ में वृद्ध द्वारा किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इनकार करते हुए राशि ट्रांसफर करने का आग्रह किया गया। पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें शांतिपूर्वक, संवेदनशीलता एवं विश्वास के साथ समझाया गया, जिस पर वृद्ध भावुक होकर रो पड़े और बताया कि उन्हें स्वयं को मुंबई पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों द्वारा गिरफ्तारी का भय दिखाया जा रहा है।
वृद्ध द्वारा अपने मोबाइल फोन पर प्राप्त व्हाट्सएप संदेश, वीडियो कॉल एवं न्यायालय के गिरफ्तारी वारंट की प्रति पुलिस अधिकारियों को दिखाई गई, जो अवलोकन पर पूर्णतः फर्जी
पाई गई। अधिकारियों द्वारा उन्हें स्पष्ट किया गया कि उक्त दस्तावेज व कॉल पूरी तरह से साइबर ठगों द्वारा भेजे गए हैं तथा उन्हें किसी भी प्रकार की गिरफ्तारी का कोई खतरा नहीं है। साथ ही यह भी आश्वस्त किया गया कि उज्जैन पुलिस उनके साथ है एवं वे पूर्णतः सुरक्षित हैं।
पूछताछ में वृद्ध ने बताया कि वे सेवानिवृत्त आर्मी अधिकारी (लेफ्टिनेंट) हैं एवं अपनी पत्नी के साथ ग्राम लैकोड़ा में निवास करते हैं। बीते दिन दोपहर से अज्ञात व्यक्तियों द्वारा लगातार स्वयं को मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर कॉल किए जा रहे थे। ठगों द्वारा यह बताया गया कि उनके नाम की एक सिम का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है, उनका नाम ब्लैकलिस्ट हो गया है, अब तक 136 व्यक्तियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और वे 137वें नंबर पर हैं। विश्वास दिलाने हेतु व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से पुलिस कार्यालय जैसा दृश्य पुलिस वर्दी में व्यक्तियों को दिखाया गया।
गिरफ्तारी के भय एवं मानसिक दबाव में वृद्ध द्वारा बैंक खुलते ही राशि ट्रांसफर करने सहमति दे दी गई थी तथा उन्हें लगातार वीडियो एवं ऑडियो कॉल पर जोड़े रखा ग आज बैंक पहुंचकर राशि ट्रांसफर करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे उज्जैन पुरि. की तत्परता, सजगता एवं सूझबूझ से समय रहते विफल कर दिया गया।
पुलिस अधिकारियों द्वारा वृद्ध की पत्नी से भी संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई
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