विश्व ध्यान दिवस (21 दिसंबर) पर गायत्री मंदिर, गुना में होगा ध्यान सत्र का आयोजन

मोहन शर्मा म्याना

विश्व ध्यान दिवस (21 दिसंबर) पर गायत्री मंदिर, गुना में होगा ध्यान सत्र का आयोजन

 21 दिसंबर को प्रतिवर्ष विश्व ध्यान दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर गायत्री मंदिर गुना में योगाचार्य महेश पाल के मार्गदर्शन में 21 दिसंबर को प्रातः 7 से 8 बजे तक विशेष ध्यान सत्र का आयोजन किया जाएगा। इस ध्यान सत्र में अधिक से अधिक संख्या में लोग जुड़कर अपना शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं यह आयोजन लोगों को ध्यान के महत्व, उसकी विधि और उसके जीवन में पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों से परिचित कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि आज के तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे जीवन में ध्यान एक ऐसी साधना है, जो मन, मस्तिष्क और शरीर—तीनों को संतुलन प्रदान करती है।ध्यान है स्वयं मै स्वयं को खोजने का अभ्यास, संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) ने 6 दिसंबर 2024 को एक प्रस्ताव पारित करके 21 दिसंबर को हर साल “विश्व ध्यान दिवस (World Meditation Day)” के रूप में घोषित किया। यह घोषणा ध्यान की सार्वभौमिकता, स्वास्थ्य-और-कल्याण में उसके योगदान, और मानसिक शांति व सामूहिक भलाई के महत्व को रेखांकित करने के लिए की गई थी। पहला विश्व ध्यान दिवस 21 दिसंबर 2024 को मनाया गया ,और अब यह प्रत्येक वर्ष 21 दिसंबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 2024 के उद्घोष के साथ ध्यान दिवस के लिए प्राथमिक थीम घोषित की जिसका नाम है “Inner Peace, Global Harmony” अर्थात “आंतरिक शांति, वैश्विक सद्भाव”। यह थीम ध्यान के माध्यम से व्यक्तिगत मानसिक शांति को बढ़ावा देने के साथ-साथ विश्व स्तर पर एकता, संतुलन और सहयोग की भावना को जागृत करने पर केंद्रित हैं। ध्यान अभ्यास करने से 1 दिन पहले कुछ महत्वपूर्ण आवश्यक बातों का ध्यान रखना जरूरी है जिसमें साधक को पाचन तंत्र को हल्का रखना है, अत्यधिक तला-भुना, मसालेदार, जंक फूड और अधिक मिठाई से बचें।रात का भोजन हल्का और जल्दी करें भारी भोजन से शरीर सुस्त और मन अशांत रहता है, जिससे ध्यान में एकाग्रता नहीं बन पाती है, कम से कम 7–8 घंटे की गहरी नींद लें।देर रात जागना, मोबाइल या स्क्रीन का अधिक उपयोग कम करें। नींद की कमी से ध्यान के समय उनींदापन, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन होता है।चाय, कॉफी, तंबाकू, गुटखा, शराब आदि का सेवन नहीं करें। ये पदार्थ मन को अत्यधिक उत्तेजित करते हैं और ध्यान में स्थिरता नहीं आने देते।पर्याप्त पानी पिएँ, लेकिन ध्यान से ठीक पहले बहुत अधिक पानी न लें।निर्जलीकरण से थकान और सिरदर्द हो सकता है, जबकि अधिक पानी से बार-बार उठने की जरूरत पड़ती है ध्यान से पहले मन में भय,अति अपेक्षा या जल्द परिणाम पाने की सोच न रखें। स्वयं को मानसिक रूप से शांत और सहज बनाएँ। ध्यान एक मानसिक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति अपने चंचल मन को एक बिंदु पर केंद्रित करता है। यह एकाग्रता, जागरूकता और आत्मबोध की अवस्था है। ध्यान के माध्यम से मन की अनावश्यक चिंताओं, नकारात्मक विचारों और मानसिक अशांति से मुक्ति मिलती है। भारतीय ऋषि-मुनियों ने ध्यान को आत्मिक उन्नति का प्रमुख साधन बताया है। योगशास्त्र में ध्यान को अष्टांग योग का सातवां अंग माना गया है, जो समाधि की ओर ले जाता है।ध्यान से मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद में कमी आती है। एकाग्रता, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है। यह रक्तचाप को संतुलित करता है, नींद को बेहतर बनाता है और व्यक्ति को आत्मिक शांति प्रदान करता है।ध्यान केवल बैठकर आँख बंद करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और जीवनशैली की तैयारी से जुड़ा अभ्यास है। यदि ध्यान से 2–3 दिन पहले भोजन, नींद, दिनचर्या और स्वास्थ्य का सही ध्यान रखा जाए, तो ध्यान अधिक गहरा, सुरक्षित और लाभकारी बनता है।

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