खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने दिल्ली में किया नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का किया स्वागत अभिनंदन।

शेख़ आसिफ खंडवा

खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने दिल्ली में किया नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का किया स्वागत अभिनंदन।

खंडवा। भाजपा संगठन की नजर काफी तेज है। छोटे से कार्यकर्ता को सम्मान देकर बड़े पदों पर बैठाने की परंपरा भाजपा में है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए कई नाम सामने आ रहे थे लेकिन एक ऐसा नाम जो कोई सोच नहीं सकता था भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने बिहार के सामान्य कार्यकर्ता नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय कार्यक्रम अध्यक्ष नितिन नबीन का स्वागत व सम्मान दिल्ली में सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल द्वारा किया गया। इस अवसर पर सांसद श्री पाटिल के साथ ही खरगोन के सांसद गजेंद्र पटेल एवं प्रदेश के भाजपा सांसदों ने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत अभिनंदन किया एवं शुभकामनाएं दी। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि भारतीय राजनीति में कई दृश्य आते-जाते रहते हैं, लेकिन कुछ दृश्य केवल तस्वीर नहीं होते वे विचारधारा, संस्कार और राजनीतिक संस्कृति का जीवंत प्रमाण बन जाते हैं। ऐसा ही एक दृश्य तब सामने आता है जब देश के गृह मंत्री आदरणीय अमित शाह जी जो सत्ता और व्यवस्था का प्रतीक हैं, एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन जी के स्वागत की प्रतीक्षा करते दिखाई देते हैं। यह केवल एक क्षण नहीं, बल्कि भाजपा की उस संस्कृति का परिचय है जहाँ पद व्यक्ति को बड़ा नहीं बनाता, बल्कि संगठन पद को मर्यादा देता है।यहाँ शीर्ष पदों पर बैठे लोग भी स्वयं को पहले कार्यकर्ता मानते हैं। निर्णय व्यक्ति नहीं, संगठन करता है। यही कारण है कि एक साधारण पृष्ठभूमि से आया कार्यकर्ता, अपनी तपस्या, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा के बल पर राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुँचता है और वहाँ भी संगठनात्मक प्रक्रिया के सामने विनम्र रहता है।भाजपा का संस्कार सिखाता है कि “पार्टी व्यक्ति से बड़ी है, और राष्ट्र पार्टी से भी बड़ा।यही कारण है कि सत्ता में होने के बावजूद नेतृत्व में अहंकार नहीं दिखता, बल्कि अनुशासन और प्रतीक्षा दिखाई देती है। यह दृश्य लाखों कार्यकर्ताओं को यह भरोसा देता है कि उनका परिश्रम, निष्ठा और संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाएगा।आज देश जब राजनीति में भरोसे, पारदर्शिता और नैतिकता की तलाश करता है, तब भाजपा का यह संस्कार एक आश्वासन बनकर उभरता है कि भारत की राजनीति केवल उपनामों से नहीं, बल्कि संघर्षशील कार्यकर्ताओं के पसीने से आगे बढ़ सकती है।

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