केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 को प्रतिस्थापित करने के लिए लोकसभा में ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका की गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक’ (VB-G RAM G Bill) पेश करने के लिए तैयार है। यह कदम मांग-आधारित ढांचे से आपूर्ति-आधारित योजना की ओर एक बदलाव को चिह्नित करेगा।
*विधेयक की मुख्य विशेषताएं:*
* *आवंटन और बजट:* नई प्रणाली के तहत, आवंटन केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित एक निश्चित बजट के भीतर सीमित (capped) होगा। यह आवंटन उन ‘मापदंडों’ पर आधारित होगा जिन्हें अभी निर्दिष्ट नहीं किया गया है।
* *कार्य दिवसों में वृद्धि:* यह विधेयक गारंटीकृत कार्य दिवसों की संख्या को 100 से बढ़ाकर 125 करता है।
* *अधिसूचित क्षेत्र:* रोजगार केवल केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित ग्रामीण क्षेत्रों में ही प्रदान किया जाएगा।
* *योजना को रोकना (Pausing of Scheme):* विधेयक कृषि मौसम (peak agricultural seasons) के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता की सुविधा के लिए योजना को रोकने की अनुमति देता है।
* *तकनीकी हस्तक्षेप:* मनरेगा के तहत शुरू किए गए तकनीकी हस्तक्षेपों—जैसे मोबाइल ऐप-आधारित उपस्थिति, आधार-आधारित भुगतान प्रणाली और कार्यस्थलों की जियोटैगिंग—को अब कानून में संहिताबद्ध किया गया है।
*केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय विभाजन:*
* *बढ़ा हुआ बोझ:* विधेयक राज्यों पर वित्तीय बोझ को कुल व्यय के मौजूदा 10% हिस्से से बढ़ाकर 40% करता है।
* *फंड-शेयरिंग पैटर्न (धारा 22(2)):*
पूर्वोत्तर राज्यों और हिमालयी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए: *90:10* (केंद्र:राज्य)।
अन्य सभी राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए: *60:40*।
*तुलना:* मनरेगा के तहत, केंद्र श्रम मजदूरी के 100% और सामग्री मजदूरी के 75% के लिए जिम्मेदार था, जो व्यवहार में 90:10 के लागत शेयर में तब्दील होता था।
*केंद्र का नियंत्रण:*
* *आवंटन का निर्धारण (धारा 4(5)):* केंद्र सरकार प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए राज्य-वार मानक आवंटन निर्धारित करेगी, जो केंद्र द्वारा निर्धारित वस्तुनिष्ठ मापदंडों पर आधारित होगा। (मनरेगा मांग-आधारित था और आवश्यकता के आधार पर बजट बढ़ाने की लचीलापन देता था)।
* *क्षेत्रों का निर्धारण (धारा 5(1)):* केंद्र सरकार राज्य में उन ग्रामीण क्षेत्रों को अधिसूचित करेगी जहां योजना लागू की जाएगी।
*सरकार का तर्क:*
सरकार ने उद्देश्यों और कारणों के बयान में तर्क दिया है कि ग्रामीण भारत में “महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन” के मद्देनजर मनरेगा को बदलने की आवश्यकता है। इसे “विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करने” के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
*आलोचना/चुनौतियां:*
मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक सदस्य और मनरेगा के वास्तुकारों में से एक, निखिल डे ने इस कदम की आलोचना की है:
* यह दो दशकों से चले आ रहे अधिकार-आधारित ढांचे (rights-based framework) से पीछे हटने जैसा है।
* नया कानून देश को वापस आवंटन-आधारित योजनाओं की ओर ले जाता है जहां केंद्र की भूमिका बड़ी होती है और लाभार्थी की कोई विशेष भूमिका नहीं होती।
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