बढ़ने लगी ठंड, ठिठुरन से दिनचर्या हुई प्रभावित,, बढ़ने लगे मौसमी बीमारियों के पीड़ित
*खेतिया पानसेमल से******?
पिछले दिनों से मौसम में ठंडक घुल गई है। । मौसम का तापमान सुबह शाम अलग अलग चल रहा है। सुबह ठंड अधिक पड़ती दिख रही है। सुबह सुबह की ठंड ने लोगों की दिनचर्या में थोड़ा बदलाव ला दिया है। दोपहर में ठंड का असर कम है। लेकिन रात होते होते ठंड फिर बढ़ने लगती है। ठंडक बढ़ने के साथ चाय दुकानों पर भिड़ दिखने लगी है
ठंड ज्यों ज्यों बढ़ती जा रही है ऊनी वस्त्रों की मांग भी बढ़ने लगी है।शहर में सड़क किनारे ऊनी वस्त्र की अस्थायी दुकानें मप्र व सटे महारास्त्र लगी है हालांकि पिछले साल की तुलना में अभी बिक्री कम है। जर्किन,स्वेटर बिक रहे है। छोटे बच्चों में मांग कम बताई जा रही है।
ठंड के समय रजाई गादी पिंजारों से भरवाते थे समय के साथ साथ अब महंगा होने से उत्पादन कम होने से ये चलन से बाहर होती जा रही है। । जिससे कम्बल की बिक्री काफी बढ़ गई है। कम्बल भी कई वैरायटियों में आ रहे है। कपड़ा व्यवसायी मिलाप जैन ने बताया कि कम्बल के कारण अब रजाई भरवाना कम पसंद करते हैं। क्योकी कम्बल की तुलनात्मक रूप से अच्छी क्वालिटी कम खर्च में उपलब्ध हैं।
ठंड में ड्राई फ्रूट्स खाना सेहत के लिए ठीक माना जाता है। जिससे ठंड में इन चीजों की बिक्री भी बढ़ती है। किराना व्यापारी हार्दिक जैन, के मुताबिक ठंड में काजू, बादाम, किशमिश के साथ पिंड खजूर की भी अच्छी बिक्री होती है। ड्राई फ्रूट्स के भाव में कोई अधिक बढ़ोतरी नहीं हुई है।
आजकल गांव गांव में लोग वाहन लेकर सभी चीजें बेचने निकल जाते है। ऑनलाइन के साथ साथ फेरी वालो ने भी बाजारों को प्रभावित किया है। जिसका असर ऊनी वस्त्रों की बिक्री पर भी साफ साफ दिख रहा है। जर्किन, मोजे आदि गांव गांव में बिक रहे है।
सुबह सुबह की ठिठुरन के बाद खिली धूप आरामदायक महसूस होती है,,मौसम परिवर्तन के साथ मौसमी बीमारियों के पीड़ित भी अस्पताल में निरंतर आ रहे है।शासकीय चिकित्सालय के चिकित्सकों का कहना है कि ओ पी डी में मरीजो की संख्या बढ़ी है जो मुख्यत सर्दी खाँसी के पीड़ित होते है
Leave a Reply